""लिय ' शपथ""
✍👤विनय कुमार
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लिय ' शपथ, लिय ' शपथ,
अपन धरती आ अपन भाषाक,
करू उत्थान, करू उत्थान।
अकारथ जीवन केँ करू सनाथ,
जीवन मुल्यक आब राखू मान।
किछु अपन माँटि-पानिक करू ध्यान।
छी अपन धरती सँ सब भागि रहल,
मिथिलाक धरती छथि कानि रहल।
छथि जननी जन्मभूमिपुकारि रहल।
जे माँटि-पानि पँहुचेलक शिखर पर,
बिसरि बैसल छी आब ओकरे ।
जे भाषा विश्व भरि में सबस मिठगर,
जे देलक विद्यापति सन कविबर।
ओ भाषा बनल अछि आई टुगर ।
अपन निज भाषाक ध्यान धरू।
मायक भाषाक नै अपमान करू।
मिथिला आ मैथिलीक अधोगतिक,
कारणआ जिम्मेदार छी हम सब।
जगाव अपन अन्तरआत्मा केँ।
लिय' शपथ अपना आप में।
पँहुचाव मिथिला आ मैथिली के शिखर पर।
मैथिल होमक करू अभिमान।
लिय' शपथ, लिय ' शपथ,
अपन धरती आ अपन भाषाक,
करू उत्थान, करू उत्थान।
✍👤विनय कुमर,
परिहारपुर,मधुबनी
✍👤विनय कुमार
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लिय ' शपथ, लिय ' शपथ,
अपन धरती आ अपन भाषाक,
करू उत्थान, करू उत्थान।
अकारथ जीवन केँ करू सनाथ,
जीवन मुल्यक आब राखू मान।
किछु अपन माँटि-पानिक करू ध्यान।
छी अपन धरती सँ सब भागि रहल,
मिथिलाक धरती छथि कानि रहल।
छथि जननी जन्मभूमिपुकारि रहल।
जे माँटि-पानि पँहुचेलक शिखर पर,
बिसरि बैसल छी आब ओकरे ।
जे भाषा विश्व भरि में सबस मिठगर,
जे देलक विद्यापति सन कविबर।
ओ भाषा बनल अछि आई टुगर ।
अपन निज भाषाक ध्यान धरू।
मायक भाषाक नै अपमान करू।
मिथिला आ मैथिलीक अधोगतिक,
कारणआ जिम्मेदार छी हम सब।
जगाव अपन अन्तरआत्मा केँ।
लिय' शपथ अपना आप में।
पँहुचाव मिथिला आ मैथिली के शिखर पर।
मैथिल होमक करू अभिमान।
लिय' शपथ, लिय ' शपथ,
अपन धरती आ अपन भाषाक,
करू उत्थान, करू उत्थान।
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| कबि- विनय कुमार जी |
✍👤विनय कुमर,
परिहारपुर,मधुबनी


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