रक्षाबंधन
✍👤रामबाबू सिंह
की करब हम??
गहना गुड़िया कें हार !
अन्न पानिक भरल भंडार
रुपैया पैसा कें अम्बार
अकासमें ताराक कतार
आ की पूरा संसार !!
देबाक अछि तँ दिय एकटा वचन !
लाजक चुनरी जँ देखि खसैत
लजखौका सभकें देखि जँ हँसैत
तँ सिनेहक चुनरी माथ पर रखैत
बुझिह अपन बहिन सन लाज झँपैत !!
हमर रक्षाक अछि अहाँक धर्म !
मुदा बुझु आरो कें बहिनक मर्म !!
कटि जाएब नहि किन्नहु छोड़ब !
जँ उठेS फेर हाथ दुःशासन के
चिर हरणक कुप्रयास सँ पहिने
अधर्मी कलुषितक हाथ तोड़ब !!
धर्मक डारहि पकरि कS भैया
पुरा करू सपुतक कर्म !
सह सह ससरैत सपोला सभक
फण कुचि कS मेटाउ भरम !!
बहिन तँ बहिनें होईए
ओकरा लेल नहि कोनो आरि !
जेहने हम अहाँके लाली
तेहने ओ छथिन हुनक दुलारि !!
भेद-भाव किएक अपनहि सँग !
किएक नहि बुझैत छी अपनहि अँग !!
एक दोसरक मान मर्यादा
इयाद राखब जखनहि हम !
रक्षासूत्रक रक्ष पताखा
फहरायत घर घर हर दम !!
#जयमिथिला_जयमैथिली
✍👤रामबाबू सिंह मधेपुर
कलुआही 07.08.17
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