दोस्ती शीशाक केलौं भहरि गेलौ हम (गजल)
✍👤प्रदीप पुष्प
तपलौं जे रौद जेठक निखरि गेलौं हम
एत्ते चललौं कि रस्ते बिसरि गेलौं हम
मजरल हमहूँ रही फागुनक देहरि पर
पी लेलौं कीटनाशी झखरि गेलौं हम
बदलल छै लोक घ'र एत्त' नइ छै हम्मर
पाछू छै गाम आगू ससरि गेलौं हम
छाती हमरो रहै निस्सने पाथर सन
दोस्ती शीशाक केलौं भहरि गेलौ हम
नै केओ मीत नै प्रेम छुच्छे टाका
की भेटल आबि दिल्ली ठहरि गेलौं हम
✍👤 प्रदीप पुष्प
✍👤प्रदीप पुष्प
तपलौं जे रौद जेठक निखरि गेलौं हम
एत्ते चललौं कि रस्ते बिसरि गेलौं हम
मजरल हमहूँ रही फागुनक देहरि पर
पी लेलौं कीटनाशी झखरि गेलौं हम
बदलल छै लोक घ'र एत्त' नइ छै हम्मर
पाछू छै गाम आगू ससरि गेलौं हम
छाती हमरो रहै निस्सने पाथर सन
दोस्ती शीशाक केलौं भहरि गेलौ हम
नै केओ मीत नै प्रेम छुच्छे टाका
की भेटल आबि दिल्ली ठहरि गेलौं हम
✍👤 प्रदीप पुष्प
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| कबि - प्रदीप पुष्प जी |


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