चौरचन मिथिलाक अभूतपूर्व पावैन
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चौरचन पावैन!भादव शुक्ल चतुर्थी के मिथिलाक गाम गाम में चौठचन्द्र पावैन श्रद्धा सौं मनायल जाई अछि।
जे ई पूजा करै छथि सदा धनवान पुत्रवान आ प्रसन्न रहै छथि।आन प्रांत में आजुक दिन चन्द्रमा पर ढेप पाथर फेकल जाई छैक कारण आजुक दिन चन्द्रमा के कलंक लागल छनि किन्तु मिथिला में चन्द्रमा पूजाक प्रशस्ती अछि। कहल जाई अछि आई चंद्रमा जे कियो खाली हाथ देखै छथि हुनका मिथ्या कलंक लगै छनि।जखन भगवान श्रीकृष्ण पर स्यमन्तक मणि चोरीक मिथ्या कलंक लागि गेलनि त हम आहाँ कि छी।कृष्ण नारदजीक प्रेरणा सौ अहि तिथि के गणेश आ चन्द्रमाक पूजा कयलन्हि त हुनक कलंक छुटलनि। तें अपना मिथिला में ई पूजा कय फल मिठाई लय चन्द्रदेवक दर्शन कयल जाई छनि।
मिथिलानि दिन भरि निराहार रहि पवित्रता सौं नीक नीक पूरी पकवान जेना छनुआ सोहारी, चीनीक फूईट वला पूरी, रंग विरंगक पुरिकिया, टिकरी बना रंग विरंगक फल खासकय सामयिक, मधुर-मिठाई,नारियल, दहीक छाँछी सबसौं डाली कोनियाँ सजा पहिल साँझखन पूर्व सौं ठाँऊ अरिपन देल स्थान पर राखि कलशस्थापन कय चानन रक्त चानन सिनूर यज्ञोपवित अक्षत फूल फूलमाला दूईव वेलपत्र अर्घा पंचपात सौं सुसज्जित भय गणपत्यादि पंचदेवता भगवान विष्णु गौरी आ चौठीचानक पूजा कय बेराबेरी सबटा पुरी पकवान फल सौं सजल डाली हाथ में लय ई मंत्र पढैत चन्द्रदेव के दर्शन करै छथि-
सिंह प्रसेन मवधीत्सिंहो जाम्बवताहत:!
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तक:!!
इ मंत्र पढि प्रणाम करै छथि-
नम: शुभ्रांशवे तुभ्यं द्विजराजाय ते नम।
रोहिणीपतये तुभ्यं लक्ष्मीभ्रात्रे नमोऽस्तु ते।।
दही छाँछी लय प्रणाम इ मंत्र पढि-
दिव्यशङ्ख तुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम्!
नमामि शशिनं भक्त्या शंभोर्मुकुट भूषणम्!!
प्रार्थना मंत्र-
मृगाङ्क रोहिणीनाथ शम्भो: शिरसि भूषण।
व्रतं संपूर्णतां यातु सौभाग्यं च प्रयच्छ मे।।
रुपं देहि यशो देहि भाग्यं भगवन् देहि मे।
पुत्रोन्देहि धनन्देहि सर्वान् कामान् प्रदेहि मे।।
तत् पश्चात स्यमन्तक मणी,जाम्बवान पुत्र सुकुमार पर आधारित कथा ध्यान मग्न भय सुनै छथि।
ओकर बाद आरती कय विसर्जन करै छथि, मरर पर चढाओल खीर पूरी के भांगि श्रोता सबके प्रसाद वितरण करै छथि।
साभार - संस्कार मिथिला
जय मिथिला जय मैथिल जय मैथिली
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चौरचन पावैन!भादव शुक्ल चतुर्थी के मिथिलाक गाम गाम में चौठचन्द्र पावैन श्रद्धा सौं मनायल जाई अछि।
जे ई पूजा करै छथि सदा धनवान पुत्रवान आ प्रसन्न रहै छथि।आन प्रांत में आजुक दिन चन्द्रमा पर ढेप पाथर फेकल जाई छैक कारण आजुक दिन चन्द्रमा के कलंक लागल छनि किन्तु मिथिला में चन्द्रमा पूजाक प्रशस्ती अछि। कहल जाई अछि आई चंद्रमा जे कियो खाली हाथ देखै छथि हुनका मिथ्या कलंक लगै छनि।जखन भगवान श्रीकृष्ण पर स्यमन्तक मणि चोरीक मिथ्या कलंक लागि गेलनि त हम आहाँ कि छी।कृष्ण नारदजीक प्रेरणा सौ अहि तिथि के गणेश आ चन्द्रमाक पूजा कयलन्हि त हुनक कलंक छुटलनि। तें अपना मिथिला में ई पूजा कय फल मिठाई लय चन्द्रदेवक दर्शन कयल जाई छनि।
मिथिलानि दिन भरि निराहार रहि पवित्रता सौं नीक नीक पूरी पकवान जेना छनुआ सोहारी, चीनीक फूईट वला पूरी, रंग विरंगक पुरिकिया, टिकरी बना रंग विरंगक फल खासकय सामयिक, मधुर-मिठाई,नारियल, दहीक छाँछी सबसौं डाली कोनियाँ सजा पहिल साँझखन पूर्व सौं ठाँऊ अरिपन देल स्थान पर राखि कलशस्थापन कय चानन रक्त चानन सिनूर यज्ञोपवित अक्षत फूल फूलमाला दूईव वेलपत्र अर्घा पंचपात सौं सुसज्जित भय गणपत्यादि पंचदेवता भगवान विष्णु गौरी आ चौठीचानक पूजा कय बेराबेरी सबटा पुरी पकवान फल सौं सजल डाली हाथ में लय ई मंत्र पढैत चन्द्रदेव के दर्शन करै छथि-
सिंह प्रसेन मवधीत्सिंहो जाम्बवताहत:!
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तक:!!
इ मंत्र पढि प्रणाम करै छथि-
नम: शुभ्रांशवे तुभ्यं द्विजराजाय ते नम।
रोहिणीपतये तुभ्यं लक्ष्मीभ्रात्रे नमोऽस्तु ते।।
दही छाँछी लय प्रणाम इ मंत्र पढि-
दिव्यशङ्ख तुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम्!
नमामि शशिनं भक्त्या शंभोर्मुकुट भूषणम्!!
प्रार्थना मंत्र-
मृगाङ्क रोहिणीनाथ शम्भो: शिरसि भूषण।
व्रतं संपूर्णतां यातु सौभाग्यं च प्रयच्छ मे।।
रुपं देहि यशो देहि भाग्यं भगवन् देहि मे।
पुत्रोन्देहि धनन्देहि सर्वान् कामान् प्रदेहि मे।।
तत् पश्चात स्यमन्तक मणी,जाम्बवान पुत्र सुकुमार पर आधारित कथा ध्यान मग्न भय सुनै छथि।
ओकर बाद आरती कय विसर्जन करै छथि, मरर पर चढाओल खीर पूरी के भांगि श्रोता सबके प्रसाद वितरण करै छथि।
साभार - संस्कार मिथिला
जय मिथिला जय मैथिल जय मैथिली




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