भगवतीक गीत
✍👤मैथिल प्रशान्त
श्रद्धाकेँ फूल ल' क' हम आयल छी दुआरि हे मैया ।
अपन ममता भरल आँचर दियौ न' पसारि हे मैया ।।
देब की हे जगत जननी मागय टा बस हम जानी ।
आशीषक अछि असरा बिपतिमे ठोहि पारि कानी ।।
भरोसा जागि जाइ छै हमर कने दी जे दुलारि हे मैया ।
कुगामी हो भले बेटा, माय कथमपि नहि अबडेरथि ।
कुपुत्रो कष्टमे हो तैयो, व्यथा त' माय टा सुनथि ।।
बैसल छी सिंह पर अहाँ, बैसल हम हारि हे मैया ।
अहाँ कात्यायनी छी फलदायनी छी वरदायनी छी ।
सौभाग्य समृद्धिकेँ देवी मा अहाँ सुखदायनी छी ।।
मैथिल प्रशान्तकेँ सुनियौ अहाँ गोहारि हे मैया ।
~> मैथिल प्रशान्त
दुर्गौली, बेनीपट्टी ।।
✍👤मैथिल प्रशान्त
श्रद्धाकेँ फूल ल' क' हम आयल छी दुआरि हे मैया ।
अपन ममता भरल आँचर दियौ न' पसारि हे मैया ।।
देब की हे जगत जननी मागय टा बस हम जानी ।
आशीषक अछि असरा बिपतिमे ठोहि पारि कानी ।।
भरोसा जागि जाइ छै हमर कने दी जे दुलारि हे मैया ।
कुगामी हो भले बेटा, माय कथमपि नहि अबडेरथि ।
कुपुत्रो कष्टमे हो तैयो, व्यथा त' माय टा सुनथि ।।
बैसल छी सिंह पर अहाँ, बैसल हम हारि हे मैया ।
अहाँ कात्यायनी छी फलदायनी छी वरदायनी छी ।
सौभाग्य समृद्धिकेँ देवी मा अहाँ सुखदायनी छी ।।
मैथिल प्रशान्तकेँ सुनियौ अहाँ गोहारि हे मैया ।
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| कबि- मैथिल प्रशान्त जी |
~> मैथिल प्रशान्त
दुर्गौली, बेनीपट्टी ।।


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